CGL2017 के परीक्षार्थियों की क्यों नहीं सुनती मोदी सरकार

रवीश कुमार 
2017 की परीक्षा है। 2019 अगस्त तक परिणाम सामने नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला गया। अदालत ने पिछले अगस्त में रिज़ल्ट पर रोक लगा दी थी, इस साल मई में रोक हट गई। मई से अगस्त आ गया, मगर रिज़ल्ट नहीं आ रहा है। ज़ाहिर है छात्र परेशान होंगे। ये लोग भी सिर्फ अपने रिज़ल्ट के आने से मतलब रखते हैं, इन्हें इस बात से मतलब नहीं कि दूसरी परीक्षाओं के भी छात्र परेशान हैं।

टिपिकल आदत है कि मेरा हो जाए बाकी लाइन में लगे रहें। एक भी मेसेज में इस बात को लेकर एक लाइन नहीं देखी कि मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार से लेकर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने युवाओं को कितना परेशान कर रखा है। हर पीड़ित समूह सिर्फ अपनी बात लिखता है। यूपी के सहायक शिक्षक और मध्य प्रदेश के लेखपालों को स्टाफ़ सलेक्शन कमीशन की लापरवाही से कोई मतलब नहीं है। जब तक सबके हित नहीं जुड़ेंगे, एक आवाज़ नहीं होगी, आपकी कोई नहीं सुनेगा। हमारे युवा छोटे छोटे टापू बन गए हैं। स्वार्थ के टापू। सिर्फ राष्ट्रवाद के नाम पर सांप्रदायिकता उन्हें एक कर रही है। दुखद है। उन्हें कभी परिश्रम से चीज़ों को जानने का प्रयास करते नहीं देखता। सबको अंधेरा पसंद है। रौशनी उतनी ही चाहिए जिनकी नौकरी।

CGL 2017 के छात्र अंग्रेज़ी और हिन्दी में इस तरह के पत्र लिख रहे हैं। आप देखिए सांप्रदायिकता ने हमारे युवाओं की क्या गत कर दी है। उनकी कोई नहीं सुनने वाला। एस एस सी के चेयरमैन और डी ओ पी टी के मंत्री जितेंद्र सिंह जी से आग्रह है कि इन युवाओं के साथ कश्मीर जैसा बर्ताव न करें। इनका रिज़ल्ट निकालें। कुछ परीक्षार्थियों ने बताया कि ट्विटर पर अपनी समस्या को ट्रेंड करवाया तो मंत्री जी ने ब्लाक कर दिया। यह उचित नहीं है। फ़िलहाल इन दो पत्रों को पढ़ें ।

श्रीमान,

आप ही हमारी आखिरी उम्मीद बची हो।बड़े ही दुःख के साथ यह बोलना पड़ रहा है लेकिन कटु सत्य है।

SSC CGL 2017 परीक्षा के लिए हमने दिन रात लगा कर मेहनत की।न जाने कितने ऐसे भी छात्र है जो सिर्फ यह सोच के इंतजार कर रहे हैं कि एक दिन उनका दिन आएगा परंतु अफसोस इस बात का है कि वो दिन अभी तक नही आया है।
चुनाव के समय नेताओं द्वारा किये गए वादे उन्हें याद दिलाते हैं तो ब्लॉक कर दिया जाता है।

इस संकट के समय मे जब कोई भी हमारी फरियाद सुनने की जरूरत नही समझता तो हमारी आखिरी उम्मीद आप हैं
कृपया आप इस मुद्दे को उठायें क्योंकि ये मुद्दा एक नही उन 8125 जिंदगियों का और उनके परिवार वालो का है जिनका परिणाम आज भी नही आया है।

महोदय इस घड़ी में सभी का मानसिक स्तर किस तरह प्रभावित हो रहा होगा ये बात आप ही उठा सकते हैं।
चौकीदार की नोकरी करते करते लाइब्रेरी में पढ़ पढ़ के विद्यार्थोयों ने अपने 3 साल इसलिए खराब नही किये कि वो जोइनिंग आते आते मनोरोगी ही हो जावें।

धन्यवाद

Sir,
सबसे पहले तो मैं आपको मैग्ससे पुरुस्कार मिलने पर बधाई देना चाहता हूँ।

Sir आपके पास वैसे तो बहुत मैसेज आ गए होंगे ssc cgl 17 के बारे में, फिर भी मैं, मेरा और मेरे जैसे हज़ारो युवाओं का दर्द आपको बताना चाहता हूँ। आपके अलावा कोई और हमारी बात भी नही सुनता है।

मेने ये परीक्षा उन दिनों में दी थी जब मैं TB जैसी गंभीर बीमारी से गुजर रहा था। परीक्षा में अच्छे नंबर आये थे तो अपने आप पर गर्व महसूस हुआ था कि इतना सब होने के बाद भी मेने अपने मम्मी पापा को खुश किया।

पर आज 2.5 साल हो गए है इस परीक्षा का पहला चरण दिए हुए। और आज भी इस परीक्षा का कुछ भविष्य पता नही चल रहा है। 26 का हो गया हूं, राखी पर पापा से पैसे लेके दीदी को दूंगा तब भी बहुत शर्मिंदगी महसूस होगी।

अब तो ऐसे लगता है आप ही आखिरी उम्मीद हो। आप एक बार हमारे लिए आवाज उठा दीजिये। सच्चाई के लिए आवाज उठाने वालों में सिर्फ आप और अभिसार जैसे ही पत्रकार रह गए है , पर आज भी आपकी आवाज सरकार के कानों में पहुचती है।आपके कुछ करने से शायद हमारा भला हो जाये।

धन्यवाद।

रेलवे के ग्रुप डी के बारे में लिखा था। कई लाख छात्रों के फ़ार्म रिजेक्ट हो गए हैं। अब आदेश आया है कि इस महीने के अंत तक उनकी शिकायतों का निपटारा किया जाएगा। युवाओं को दो काम करना चाहिए। अपनी और दूसरे समूह की माँग के प्रति सतर्क और एकजुट रहना चाहिए और दूसरा करेंट अफ़ेयर के मसले पर मीडिया के प्रोपेगैंडा से बचना चाहिए। जानने के लिए थोड़ी मेहनत करें।

मुझे फोन न करें। कोई फ़ायदा नहीं। गालियों के हमले के कारण कोई फोन नहीं उठाता। मेरे लिए मेरा नंबर बेकार हो चुका है। आप नाहक रिंग करते रहते हैं। मुझसे टीवी पर दिखाने का आग्रह न करें। वो नहीं दिखाऊँगा। मैं लटपट नहीं करता। साफ स्पष्ट बोलना चाहता हूँ। फ़ेसबुक पर ही लिखूँगा। अगर सोशल मीडिया का इतना ढिंढोरा पीटा जा रहा है तो देखते हैं कि इसका क्या असर होता है।

आशा है सीजीएल 2017, मध्यप्रदेश के सहायक शिक्षक और लेखपाल, यूपी के 69,000 शिक्षकों को जल्द ही नियुक्ति पत्र मिलेगा। नियुक्ति पत्र मिलते ही सूचित करें। मैंने देखा है कि समस्या बताते समय हज़ारों मेसेज आते हैं और जब नौकरी मिल जाती है तो सौ भी नहीं आते हैं। मैं अपना काम करता रहूँगा। बस ये इसलिए लिखा कि पता रहे कि मैं होश में रहता हूँ। आपमें साहस नहीं है कि अपने पेज पर लिख सकें कि कौन इन मामलों को उठाता रहा है! है न यह दिलचस्प बात। मुझे मज़ा आ रहा है।

आप प्रयास करते रहें। निराश न हों। सांप्रदायिकता और अंध राष्ट्रवाद से बचें। आपका उससे बाहर आना बहुत ज़रूरी है। ख़ुद को कब तक धोखे में रखेंगे। आपको इस मीडिया के द्वारा धोखे में रखा जा रहा है। संघर्ष कीजिए। अपने लिए भी और दूसरे साथियों के लिए भी। ईश्वर आपको पढ़ने की आदत दे। इस महीने कौन कौन सी किताबें पढ़ीं वो भी कमेंट में लिखिएगा।

मेरी किताब आ रही है हिन्दी में बोलना ही है। राजकमल प्रकाशन से। अमेज़ॉन पर उपलब्ध है। आप पढ़ें और समझें कि इन पाँच सालों में सूचना को लेकर आपके साथ कैसा धोखा हुआ है।

जब भी मैं आपको इन सवालों पर लाता हूँ आप किनारा कर लेते हैं। सिर्फ नौकरी की समस्या का ज़िक्र करने का धन्यवाद कर चले जाते हैं। लेकिन आप कब तक उन सवालों से भागेंगे? भागने से सवाल नहीं बदल जाते। वो पीछा करते चले आते हैं।

धन्यवाद।
(लेखक मशहूर पत्रकार व न्यूज़ एंकर हैं)

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