ऐसे हुआ था ईयरफोन का अविष्कार...

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी के जमाने में हर किसी के पास फोन होना कोई बड़ी बात नहीं है। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई फोन में इयरफोन लगाकर गाने सुनते और बाते करते हैं। लेकिन इसे देखकर क्या आपने कभी सोचा है कि ये कहां से आया है? हर म्यूजिक लवर को इसका अविष्कार करने वाले नथेनियल बेल्डविन को शुक्रिया जरूर बोलना चाहिए। लेकिन 1910 में नथेनियल ने अपना ये कारनामा US को बेच दिया था।

US ने अपनी कारिगरी दिखाकर इसका रूख बदल दिया और आधुनिक तरीके से इसे बाजार में लेकर आए। आपको जानकर हैरानी होगी कि इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुआ था। इसकी पॉपुलैरिटी धीरे-धीरे बढ़ती गई। फिर लगभग 30 साल बाद साल 2001 में वॉकमेन बनाने वाली कंपनी ने इसे बाजार में अपने ढंग से उतारा।

उसके बाद एप्पल, मोबाइल फोन की कई कंपनियां, आईपैड और हर गैजेट में लगभग हेडफोन इस्तेमाल होने लगे। इन्हें इयरफोन भी कहते हैं और जब कानों की साइज को देखकर ये बनने लगे तो इन्हें हेडफोन भी कहा जाने लगा।

बहुत ज्यादा इयरफोन लगा कर गाने सुनने की आदत आपको परेशानियों में डाल सकती है। इससे कान से संबंधित समस्याएं होने लगती हैं। लगतार इयरफोन का इस्तेमाल करने से कानों में दर्द होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इसलिए जान लीजिए इसका ज्यादा इस्तेमाल भी ठीक नहीं है।

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