चंपारण के नील आन्दोलन से बापू को मिली थी राजनीतिक संजीवनी

राकेश पाण्डेय
मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। सन् 1883 में करीब 13 साल की उम्र में करीब छह महीने बड़ी कस्तूरबा से उनका विवाह हो गया था। उन्होंने साल 1888 में ब्रिटेन में वकालत की पढ़ाई की और 1893 में वो दक्षिण अफ्रीका चले गये। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में टॉलस्टॉय फार्म की भी स्थापना की थी।

1917 मे बिहार से शुरू हुआ था राजनीति का सफर
वहां उन्होंने रंगभेद की नीति के खिलाफ सफल आंदोलन किए। 1915 में भारत वापस आने पर उनकी मुलाकात कांग्रेसी नेता गोपाल कृष्ण गोखले से हुई। जिन्हें वह अपना राजनीतिक गुरु मानते थे। गांधीजी ने 1917 में बिहार के चंपारण से नील आंदोलन के जरिए अपने राजनीति करियर की शुरुआत की। इसके बाद 1918 में खेड़ा के किसान आंदोलन का नेतृत्व किया। वर्ष 1915 में गोखले तथा 1920 में तिलक की मृत्यु के बाद वो कांग्रेस के सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे।

1930 मे तोडा था नमक न बनाने का कानून
1919 में जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में गांधीजी ने ब्रिटिश सरकार से मिले इनाम-ओ-इकराम वापस कर दिये। ब्रिटिश सरकार के रौलेट एक्ट के खिलाफ उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की। मार्च 1930 में गांधीजी ने दांडी मार्च यात्रा शुरू की। नमक सत्याग्रह के नाम से इस यात्रा के बाद उन्होंने नमक न बनाने के ब्रिटिश कानून को तोड़ दिया था। ब्रिटिश सरकार ने भारत के स्वराज की मांग पर विचार के लिए गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया।

1942 मे दिया अंग्रेजो भारत छोडो का नारा,30 जनवरी 48 मे हो गयी हत्या
गांधीजी ने 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया। जून 1947 में ब्रिटिश वायसराय लार्ड लुई माउंटबेटन ने घोषणा की कि 15 अगस्त 1947 को हिन्दुस्तान आजाद हो जाएगा। हालांकि आजादी के साथ ही देश भारत और पाकिस्तान नाम के दो मुल्कों में विभाजित हो गया। 30 जनवरी 1948 को एक हिन्दू कट्टरपंथी नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

गांधीजी के अनमोल वचन
‘असहिष्णुता हिंसा का ही दूसरा रूप है, यह सच्ची लोकतांत्रिका भावना के विकास में बाधक है‘
‘कमजोर लोग कभी माफ नहीं करते हैं, जबकि क्षमा करना ताकतवर का सबसे बड़ा गुण है‘
‘जियो ऐसे की जैसे आपको कल ही मरना है और सीखों ऐसे की जैसे आपकों हमेशा यहीं रहना है‘
‘स्वयं की तलाश करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप दूसरों की सेवा में खुद को भुला दें‘।

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