प्रेमी ने शक पर की GF की हत्या, गला घोटकर की गई थी नीलू की हत्या

शहडोल। प्रेमी ने प्रेमिका को मौत के घाट उतार दिया, क्यों कि प्रेमिका के ऊपर प्रेमी  शक था। बातों ही बातों में पहले तो विवाद बढा और बाद में बहला फुसला कर प्रेमी ने घुमाने का बहाना किया और उसे रीवा की ओर ले चला। लेकिन अचानक ही उसने वाहन को जंगल की ओर मोड़ा और झाडिय़ों में पहुंचकर नये विवाद को जन्म दिया और गलाघोटकर उसका काम तमाम कर दिया।

बीते 23 अगस्त को डोरा नाला जंगल में भलुआ मोड़ के पास एक अज्ञात लड़की लाश मिली। इसके बाद पुलिस अधीक्षक अनिल सिंह कुशवाह एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के द्वारा इस पूरे मामले को निराकृत करने के लिये तमाम प्रयास शुरू किये। देवलोंद थाना में सूचना मिलने के बाद पुलिस कर्मचारी घटना स्थल पहुंचे और उसके बाद फॉरेंसिक जांच में शिनाख्ती के लिये मृतिका की जानकारी एवं हुलिया समाचार पत्रों के साथ ही सोशल मीडिया में डाली गई, जिसके बाद मृतक के पिता सीताशरण सिंह 24 अगस्त को थाने पहुंचे और उन्होने शिनाख्त की। जिसके बाद यह पता चला कि ग्राम पंचायत तिखवा निवासी नीलू सिंह गोंड़ 21 अगस्त को घर से ब्यौहारी जाने के लिये निकली और उसके बाद वह वापस नहीं लौटी। यहां तक तो सब सामान्य था, लेकिन जैसे ही इस मामले की पड़ताल शुरू हुई तो प्रेमी और प्रेमिका का वह प्रेम सामने आ गया जिसमें समर्पण की जगह शक ने ले ली और पे्रमी ही प्रेमिका का कातिल बन गया।

उपेंद्र ने खोला राज
डोरा नाला के जंगल में अज्ञात लड़की की लाश लोगों के लिये परेशानी का सबब बनी हुई थी, लेकिन जैसे ही पे्रम कहानी का पहला पन्ना खुला तो उसमें पे्रमी ने राज पर राज खोलना प्रारंभ कर दिया। पुलिस की लाठियों में कितना दम था इस बात को बताने की आवश्यकता नहीं है बस उसके खौफ में ही एक दरिंदे की पे्रम कहानी सामने आ गई। उपेंद्र ने पुलिस को बताया कि वह कौआसरई जयसिंहनगर का निवासी है और काफी समय से दोनो के बीच में पे्रम प्रसंग चल रहा था। 21 अगस्त को ही वह प्रेमिका को लेकर देवलोंद की ओर जा रहा था। जंगल में दोनो के बीच में किसी बात को लेकर कहा सुनी हो गई और उसने पे्रमिका की गलादबाकर हत्या कर दी। उसने बताया कि उसकी प्रेमिका किसी दूसरे पे्रमी के साथ भी प्रेम  करती थी जिसकी वजह से दोनो के बीच मे विवाद हुआ। जिसके बाद उसने दोनो हाथों से गलादबाकर प्रेमिका की प्रेम कहानी का इतिश्री कर दिया।
चौकन्ना रही पुलिस
इस पूरे मामले को निराकृत करने के लिये जहां पुलिस अधीक्षक एवं उप पुलिस अधीक्षक दिशा निर्देश देते हुये नजर आये वहीं थाना प्रभारी जालम सिंह एवं उप निरीक्षक विजय सिंह, एहसान खान, सुशील तिवारी, चरण सिंह, अनिल गौतम, धीरेंद्र भदौरिया, विनोद तिवारी, प्रदीप द्विवेदी, उदय रावत, सुखेंद्र त्रिपाठी के साथ ही सायबर सेल की भूमिका महत्वपूर्ण रही। अंधे कत्ल के रहस्य को उदृत करना जितना आवश्यक था उतना ही आवश्यक लोगों के मन में व्याप्त भय को दूर करना भी आवश्यक था। इस मामले में कर्मचारियों को पुरस्कृत किये जाने की घोषणा की गई।

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