पुलिस के हैड कांस्टेबल अब्दुल गनी की हत्या का जिम्मेदार कौन?

एसपी मित्तल 
राजस्थान के राजसमंद जिले के भीम थाना क्षेत्र के एक भूमि विवाद के प्रकरण की जांच करने मौके पर गए हैडकांस्टेबल अब्दुल गनी को कुछ लोगों ने पीट पीट कर मौत के घाट उतार दिया। गनी की हत्या तब की गई, जब वे मौके पर रिपोर्ट बना कर लौट रहे थे।

हालांकि गनी को सरिए आदि से मारने वालों में कोई आधा दर्जन लोग शामिल थे, लेकिन अब पुलिस के आला अधिकारियों और सरकार में बैठे लोगों का कहना है कि अब्दुल गनी को भीड़ ने नहीं मारा है। सरकार इसे सामान्य अपराध की घटना मान रही है। 

अब्दुल गनी की जिस तरह हत्या हुई उस पर जहाजपुर की मुस्लिम पंचायत के अध्यक्ष नजीर मोहम्मद ने नाराजगी जताई। नजीर ने सरकार से मांग की है कि मृतक के परिजन को पचास लाख रुपए का मुआवजा, परिवार के दो सदस्यों को नौकरी, भीलवाड़ा में आवास तथा बालिग होने तक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने की घोषणा की जाए। साथी ही अब्दुल गनी को शहीद होने का दर्जा भी दिया जाए।

नजीर और परिजन ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती तब तक शव का दफन नहीं होगा। परिजन की इस घोषणा के बाद भीलवाड़ा का पुलिस और जिला प्रशासन समझाइश में जुट गया है।

14 जुलाई को पुलिस के आला अधिकारी भीलवाड़ा पुलिस लाइन तक तो सम्मान के साथ शव को लाए लेकिन शव को अब्दुल गनी के घर पहुंचाने के बाद किसी ने भी हालात की सुध नहीं ली। सवाल उठता है कि जब इतनी नाजुक स्थिति बनी हुई थी तो फिर सरकार और प्रशासन के प्रतिनिधि कहां चले गए। जाहिर है कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता के साथ नहीं ले रही है। परिजन की मांग न्यूज चैनलों पर भी प्रसारित होती रही, लेकिन सरकार के किसी भी मंत्री ने गंभीरता नहीं दिखाई।

डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने ट्वीटर पर खेद प्रकट कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी।  सवाल उठता है कि क्या अपराधियों में पुलिस का भय खत्म हो गया है? जो अब्दुल गनी ड्यूटी पर था उसे यदि इस तरह मार डाला जाएगा तो फिर राजस्थान में कानून व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। पिछले दिनों झारखंड में रहमत नाम के एक युवक को भी पीट पीट कर मार डाला गया।

इस घटना के विरोध में देशभर में प्रदर्शन और मौन जुलूस निकाले गए। राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार है और गहलोत भी भीड़तंत्र की निंदा कर चुके हैं। गहलोत ने भी झारखंड की घटना की निंदा की थी, लेकिन जब राजस्थान में 13 जुलाई को हैडकांस्टेबल अब्दुल गनी की हत्या की गई तो सरकार का कहना है कि यह भीड़तंत्र वाला मामला नहीं है। यानि झारखंड और राजस्थान में हुई घटनाओं के मायने अलग अलग हैं।

बताया जा रहा है कि अब्दुल गनी की हत्या के सात आरोपियों को चिन्हित कर लिया गया है और जल्द ही गिरफ्तारी होगी। पुलिस के अनुसर कमला देवी ने भीम पुलिस स्टेशन पर नैनादेवी सहित दस लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इस रिपोर्ट में नैनादेवी के पक्ष वालों पर जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया। पुलिस का कहना है कि जमीन के इसी मामले में अब्दुल गनी की हत्या की गई।

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