राजस्थानी संस्कृति की महिलाएं सावन के इस खुशनुमा मौसम में इस वजह से पहना करती है लहरिया

इंटरनेट डेस्क : हमारी भारतीय संस्कृति में खास तरह की परम्पराएं और रीति-रिवाज है अगर बात राजस्थानी संस्कृति की जाएं तो राजस्थान की महिलाओं में खास अवसरों पर विशेष तरह का पहनावा जाता है वह रीति-रिवाज निभाए जाते है जल्द ही सावन का पर्व शुरु होने वाला है सावन के महीने में राजस्थान की महिलाएं बड़े चाव से लहरिया पहनने का चाव रखती है लहरिया राजस्थान की लोक कला से प्रेरित है। इस प्रिंट की शुरुआत 19 वीं शताब्दी में हुई थी। और राजस्थान, खासकर मेवाड़ से जुड़े स्थानों की संस्कृति में आज भी इसे पहनने की खास परम्परा है। सावन के महीनें में रंग-बिरंगे आकर्षक प्रिंटों वाला लहरिया मन को मोह लेता है सावन सोमवार में शिव की पूजा में महिलाएं लहरिया साड़ी, लहरियां सूट या लहरियां लहंगा पहनकर पूजा करती है जिसकी डिमांड इस मौसम में सबसे ज्यादा होती है और इसे पूजा में पहनना बेहद शुभ होता है। ऊपर-नीचे उठती हुई आड़ी-तिरछी वाला लहरियां प्रिंट बेहद आकर्षक डिजाइनों से तैयार किया जाता है इस प्रिंट को मारवाड़ी और राजपूत महिलाएं पहनना काफी पसंद करती है। एक ही कपड़ें पर कई अलग-अलग रंगों की डाई लाइन की जाती है । सावन महीने में शिवलिंग पर चढ़ा रहे है बिल्व पत्र, तो जान लेंवे ये जरुरी बातें राजस्थान संस्कृति की महिलाओं में लहरियां पहनने का इसलिए विशेष महत्व माना जाता है की उनका ऐसा मानना है की सावन में लहरिया पहनना सौभाग्य का प्रतीक होता है सावन में लहरिया पहनने से इस बारिश के महीने को उत्सव के रुप में मनाने की खास परम्परा है शिव गौरी के पूजा में अगर लहरियां पहना जाएं तो भोले और गौरी मां की कृपा आप हमेशा बनी रहती है सुहागन महिलाओं के जीवन में लहरियां एक विशेष महत्व रखता है जिस लड़की की नई शादी होती है उसे ससुराल की और से लहरियां भेजा जाता है। जो उसके वैवाहिक जीवन के लिए बेहद खास होता है। जानिए सावन के महीने में आखिर क्यो निकाली जाती है कावड़ यात्रा

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