हनुमान चालीसा पढ़ने पर इशरत जहां का विरोध क्यों?

एसपी मित्तल 
अजमेर स्थित विश्व विख्यात सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में रोजाना जितने मुसलमान जियारत के लिए आते हैं उससे कहीं ज्यादा हिन्दू सूफी परंपरा के अनुरूप जियारत करते हैं। दरगाह का खादिम समुदाय भी मानता है कि जियारत करने वाले हिन्दुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। खादिम समुदाय भी पूरी शिद्दत से हिन्दुओं को जियारत करवाता है।

हिन्दुओं के जियारत करने पर कभी भी एतराज नहीं हुआ, क्योंकि यह आस्था का मामला है। अजमेर की दरगाह में ही नहीं बल्कि दिल्ली में निजामुद्दीन औलिया और देश अन्य दरगाहों में हिन्दू बड़ी संख्या में जियारत करते हैं, लेकिन गत 16 जुलाई को मंगलवार के दिन पश्चिम बंगाल के हावड़ा में इशरत जहां नाम की एक मुस्लिम युवती के द्वारा हनुमान चालीसा के पाठ में भाग लेने पर बवाल हो गया है।

सैकड़ों मुसलमान इशरत जहां का विरोध कर रहे हैं। जिस मकान में इशरत रहती है उसके मालिक ने मकान खाली करने का फरमान जारी कर दिया है। इशरत के यह समझ में नहीं आ रहा कि आखिर पाठ में शामिल होकर उसने कौनसा गुनाह कर दिया है? यदि किसी मंदिर के बाहर कोई धार्मिक आयोजन हो रहा है तो क्या उसमें कोई मुस्लिम औरत थोड़ देर के लिए शामिल नहीं हो सकती? सेक्यूरलवादी जब हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे का नारा देते हैं तो फिर इशरत जहां का विरोध क्यों हो रहा है?

इस पूरे प्रकरण में इशरत जहां की हिम्मत की दाद देनी होगी। इशरत कट्टरपंथियों के सामने झुकने को तैयार नहीं है। इशरत का कहना है कि उसने मुस्लिम धर्म के विरुद्ध कोई कार्य नहीं किया है। अपनी सुरक्षा के लिए इशरत ने अब पुलिस से गुहार लगाई है। इशरत का मुस्लिम महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने तीन तलाक की पंरपरा के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

क्या सांसद नुसरत जहां मदद करेंगी?
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने टीएसमी की सांसद नुसरत जहां को उदारवादी चेहरे के तौर पर प्रस्तुत किया है। बंग्ला फिल्मों की अभिनेत्री नुसरत ने उद्योगपति निखिल जैन से विवाद किया है। गत चार जुलाई को नुसरत ने कोलकाता में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में उपस्थिति दर्ज करवाई। सवाल उठता है कि क्या नुसरत जहां अब इसारत जहां की मदद के लिए आगे आएंगी? क्या इशरत को नया घर दिलवाया जाएगा? क्या नुसरत जहां इशरत की ओर से कट्टरपंथियों को जवाब देंगी? यदि टीएमसी की सांंसद नुसरत मदद के लिए आगे आती हैं तो माना जाएगा कि अब ममता बनर्जी की सोच में भी बदलाव आएगा, लेकिन नुसरत ऐसा नहीं करती हैं तो यही माना जाएगा कि ममता बनर्जी अपनी सांसद का चेहरा आगे कर हिन्दुओं के वोट हासिल करना चाहती हैं। लोकसभा चुनाव में बंगाल में भाजपा को 18 सीटों पर जीत मिली है, जबकि टीएमसी को मात्र 22 सीटें ही मिल सकीं।

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