JNU के सिक्युरिटी गार्ड ने पास की एंट्रेस परीक्षा

जेएनयू के मेन गेट पर नौकरी करने वाले गार्ड रामजल मीणा ने जेएनयू की प्रवेश परीक्षा पास की है। अब मीण यहां रशियन भाषा में एडमिशन ले रहे हैं। गेट पर खड़े होकर छात्रों को पढ़ता देखकर उनके मन में यहां की क्लासरूम तक पहुंचने का सपना जागा था। जो उन्होंने काम से बचे समय में पढ़ाई करके पूरा कर लिया है। अब बस उनका एक ही सपना बचा है, वो सपना है आइएएस बनने का।

जेएनयू में पिछले 5 साल से सिक्यूरिटी गार्ड का काम कर रहे रामजल राजस्थान के अन्यंत पिछड़े जिले करौली के गांव भजेरा के रहने वाले हैं। वो बताते हैं कि 2003 में उनकी शादी हो गई थी। उस दौरान घर में तीन बहनों और माता-पिता की जिम्मेदारी उन्हीं के ऊपर थी। नतीजा ये हुआ कि उनकी बीएससी की पढ़ाई दूसरे साल में ही रुक गई।

रामजल ने कहा कि कि उन्होंने अपने पिता नथोलीराम के साथ मिलकर मजदूरी करके तीन बहनों की शादी की।अब छोटा भाई 12वीं के बाद नर्स की पढ़ाई कर रहा है। वो कहते हैं कि 33 साल की उम्र में ही मैंने मानो पूरी दुनिया देख ली। अब रोजी-रोटी के लिए जीएस4 में गार्ड की नौकरी करने लगा था। पिछले पांच साल से यहां हूं। यहां का माहौल मुझे बहुत पसंद आता है। यहां रहते रहते मैंने बीए की परीक्षा 2018 में राजस्थान से पास की। अब एमए का पहला साल चल रहा है। वो कहते हैं कि मेरा बहुत मन था कि किसी तरह जेएनयू के अध्यापकों से पढ़ाई करूं।

रामजल ने बताया कि मैंने यहां एंट्र्रेंस देकर रशियन लैंग्वेज में एडमिशन लिया है। यहां मुझे क्लास करने की इजाजत मिल गई है। अब मैं कक्षा में पढ़ाई के साथ साथ यहां गार्ड का काम भी करता रहूंगा। वो बताते हैं कि उनके घर में उनकी पत्नी के अलावा तीन बच्चे जिनमें दो बेटियां और एक बेटा है, वो कहते हैं कि मेरे बच्चे भी पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं। मैं बस यही चाहता हूं कि किसी भी तरह मैं अपने बच्चों को दिल्ली में अच्छी शिक्षा दिला सकूं।

रामजल का कहना है कि मैं चाहता हूं कि जेएनयू से पढ़ाई पूरी करके आईएएस की तैयारी करूं। मेरा सपना आईएएस अफसर बनकर देश सेवा करने का है। इसके अलावा मैं अपने बच्चों और माता-पिता को भी अच्छी सुविधाएं देना चाहता हूं। वो बताते हैं कि किस तरह उन्होंने पिछले महीने पिता की बीमारी के लिए 20 हजार रुपये कमाकर दिए। वो कहते हैं कि मेरे पास मेहनत करने और पढ़ाई के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

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