देव्यागिरी के महंत बनने के फैसले पर 9 दिन घर मे नहीं जला था चूल्हा

गोमती तट पर बसे मनकामेश्वर मन्दिर का इतिहास रामायण काल का है। मन्दिर की महंत देव्यागिरी प्रदेश की एकमात्र महिला महंत हैं। बीएससी करने के दौरान वो अक्सर मन्दिर आती रहती थीं लेकिन एक बार मंदिर में उनके साथ एक अजीब घटना हुई।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार वो कहती हैं जब मैं मन्दिर आई और शिवलिंग पर हाथ रखा तो लगा कि शिवलिंग गायब हो गया और शरीर मे कुछ अजीब सा होने लगा।

आंखों के नीचे अंधेरा छा गया और डर भी लगा कि पुजारी जी से क्या बताउंगी की शिवलिंग गायब हो गया। बहुत देर तक ऐसी ही हालत में रही और फैसला लिया कि अब शिव जी की भक्ति में ही जीवन व्यतीत करूंगी।

देव्यागिरी के पिता आज अखबार में ब्यूरो चीफ थे। घर मे बहनें भी हैं लेकिन उनका लालन-पालन ननिहाल में ज़्यादा हुआ। जब उन्होंने घर में बताया कि वह शिव जी के चरणों मे रहना चाहती हैं तो घर में 9 दिन तक चूल्हा नही जला। किसी ने खाना नहीं खाया। ऐसा लग रहा था जैसे किसी की मय्यत हो गयी है लेकिन देव्यागिरी का फैसला अटल था। 


Source : upuklive

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