पर्यावरण रक्षा को साधु-संत आगे आएं : भागवत

हरिद्वार।  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत का कहना है कि हिंदू धर्म के अंदर अनादि काल से पर्यावरण को पूजा जाता रहा है परंतु ग्लोबल वार्मिंग के कारण आज पर्यावरण खतरे में हैं उस पर्यावरण की रक्षा अपने देश का साधु संत कर सकता है। यह शब्द भागवत ने गुरुवार को धर्म जागरण समन्वय विभाग द्वारा पतंजलि में आयोजित साधु स्वाध्याय संगम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहे।

भागवत ने कहा कि हम प्रकृति के पुजारी हैं हमने प्रकृति को मां माना है हमने तुलसी को माना है। हमने वट वृक्ष और पीपल को पूजा है। हम संस्कृति को बचाने का काम करते हैं। जल को जीवन के रूप में देखते हैं। आज गाय, गंगा और वृक्ष इन सबको भी संरक्षित करने की आवश्यकता है। यह हमारा भविष्य है हमारी जो संतति है उसका भी भविष्य है। उस संतति को आगे लेकर चलना और उस संतति के लिए वर्तमान में चिंतित रहना उस चिंतित विषय को चिंता में बदलना समाज के अंदर इस चिंता का जन जागरण स्थापित करना यह हम सबका मुख्य कार्य हो जाता है।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि साधु समाज हिंदू संस्कृति के उत्थान के लिए अपने जीवन को त्याग कर भगवा धारण कर राष्ट्र के निर्माण में लगा हुआ है। साधु समाज ही भारत को विश्व गुरु के स्थान पर पहुंचानें की शक्ति रखता है। यह साधु समाज विश्व के अंदर सुख शांति समृद्धि और राष्ट्र निर्माण की जो दिशा है सर्वे भवंतु उसके ऊपर लेकर चलने का आह्वान कर सकता है। भागवत ने कहा कि भारत देश के अंदर अभी तक संतों का सम्मान सर्वोपरि है संत जगत में उस सम्मान के लिए अपने आप को उसके अनुकूल बनाना और समाज को त्याग समर्पण की भावना की प्रेरणा देना यह हमारा आज के समय की महती आवश्यकता है।

अध्यक्षीय भाषण में गोविंद देव गिरी ने सभी साधु संतों का आभार जताया। कार्यक्रम में सैकड़ों साधु संतों के अलावा 34 प्रांतों से 21 मत पंथ संप्रदाय के संत उपस्थित रहे। इस अवसर पर उत्तराखंड के प्रांत प्रचारक धर्म जागरण के राष्ट्रीय संयोजक शरद डोले, संघ के विभाग प्रचारक शरद, रामप्रकाश, नरसिंह, थावरगिरि, गंगानाथ, श्रीनिवास, आनंदपुरी, कांतिलाल व्यास आदि शामिल थे। धर्म परिवर्तन देशद्रोहभागव बोले जो लोग हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपना रहे है। वो देश द्रोही बन रहे हैं। लोग सोचते हैं कि इसाई बनने से हमे पैसा ओर रोजगार मिलेगा। लेकिन अच्छे संस्कार नही मिलेंगे।

हिन्दू धर्म हमे संस्कार सिखाता है। कई लोग अपनी इच्छा अनुसार घर वापसी कर रहे हैं। हिन्दू धर्म में इतने वेद पुराण की बातों को थोपा नहीं जाता है। हिन्दू धर्म के लोग स्वयं ही अपने पुराण एंव वेदों को मानते हैं।हर हाथ गीता का पाठसंतों ने कहा कि भागवत गीता के आधार पर लोगों को जोड़ा जा रहा है। घर घर में गीता हर हाथ गीता का पाठ का आयोजन किया जा रहा है। समय बदल रहा है लोग खुद अभियान से जुडऩे लगे है।

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