नुसरत जहां को उलेमा की सलाह- अपना नाम भी बदल ले, क्यों इस्लाम को बदनाम करती है?

लखनऊ। नुसरत जहां से नाराज देवबंदी उलेमा ने कहा कि वह क्यों गैर मजहबी वाले काम कर रही है. क्योंकि इस्लाम में अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करना हराम है. अगर नुसरत जहां को गैर मजहबी काम करने हैं, तो क्यों नहीं नुसरत जहां अपना नाम बदल लेती है. इस तरह के अमल कर के नुसरत जहां इस्लाम और मुसलमानों की क्यों तोहीन कर रही हैं।

इत्तेहाद उलेमा ए हिन्द के उपाध्यक्ष मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि नुसरत जहां का यह पूजा करना कोई पहली बार नहीं है, इससे पहले भी वे पूजा करती रही हैं. इसी अमल को दोहराते हुए उन्होंने इस बार भी नव दुर्गा की पूजा की है।

मैं समझता हूं कि इस तरह का अमल इस्लाम के अंदर बिल्कुल जायज नहीं है. इस्लाम इस चीज की इजाजत नहीं देता है कि अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत की जाए किसी और की पूजा की जाए. यह इस्लाम के अंदर हराम है और शिर्क करना हराम है।


न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि देखिए मैं तो उनको अपना जाति मशवरा यही देता हूं कि जब वह इस्लाम को नहीं मानती हैं. इस्लाम के ऊपर अमल नहीं कर रही हैं. सारे काम गैरों के कर रही हैं, उन्होंने शादी भी की तो गैर मजहब में. मैं उनको मशवरा देता हूं कि वह अपना नाम भी बदल ले, क्यों इस्लाम को बदनाम करती है. इस तरीके के नाम रखकर मुसलमानों की और इस्लाम की तोहीन क्यों कर रही हैं। 

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