शिवजी के आंसुओं से हुई रुद्राक्ष की उत्पत्ति

इंटरनेट न्यूज पुराणों,ग्रंथों में बताया गया हैं कि भगवान शिव बहुत ही भोले देवता हैं।जो व्यक्ति शुद्ध मन से इनकी सेवा करता हैं उससे जल्दी प्रसन्न हो कर वरदान देने के लिए उपस्थित हो जाते हैं।जिससे उनकी सभी परेशानिया दूर हो जाती हैं।शिवजी की कृपा पान के लिये सभी लोग रुद्राक्ष धारण करते है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिवजी के आंसुओं से हुई है। इस संबंध में कहा जाता है कि एक बार शिवजी ध्यान में बैठे थे और उस समय उनकी आंखों से आंसु गिरे। ये आंसु ही रुद्राक्ष के वृक्ष में परिवर्तित हो गए। इसीलिए इसे शिवजी का प्रतीक माना जाता है।बाजार में 1 मुखी से 14 मुखी तक के रुद्राक्ष मिलते हैं।जिनका का अलग-अलग महत्व है।

रुद्राक्ष आकार में 3 प्रकार का होता हैं जो रुद्राक्ष आकार में आँवले के फल के समान होता हैं उसे सबसे उतम माना जाता हैं। जिस रुद्राक्ष का आकार बेर के समान होता हैं उसे मध्यम और जो चने के आकार के होता हैं उसे निम्न श्रेणी का माना जाता हैं।

जो लोग रुद्राक्ष पहनते हैं, उन्हें गलत कामों से बचना और मांसाहार नही करना चाहिए । अपने माता-पिता की सेवा करें। अगर इन बातों का ध्यान नहीं रखा गया तो रुद्राक्ष से शुभ फल नहीं मिल पाते हैं।

ऐसे रुद्राक्ष न पहनें

जिस रुद्राक्ष को कीड़ों ने खराब कर दिया हो या टूटा-फूटा और पूरा गोल न हो। जिसमें उभरे हुए दाने न हों, ऐसा रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। जिस रुद्राक्ष में अपने आप डोरा पिरोने के लिए छेद हो गया हो, वह सबसे अच्छा रहता है।

पुराणों,ग्रंथों में बताया गया हैं कि भगवान शिव बहुत ही भोले देवता हैं।जो व्यक्ति शुद्ध मन से इनकी सेवा करता हैं उससे जल्दी प्रसन्न हो कर वरदान देने के लिए उपस्थित हो जाते हैं।जिससे उनकी सभी परेशानिया दूर हो जाती हैं।शिवजी की कृपा पान के लिये सभी लोग रुद्राक्ष धारण करते है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिवजी के आंसुओं से हुई है। इस संबंध में कहा जाता है कि एक बार शिवजी ध्यान में बैठे थे और उस समय उनकी आंखों से आंसु गिरे। ये आंसु ही रुद्राक्ष के वृक्ष में परिवर्तित हो गए। इसीलिए इसे शिवजी का प्रतीक माना जाता है।बाजार में 1 मुखी से 14 मुखी तक के रुद्राक्ष मिलते हैं।जिनका का अलग-अलग महत्व है।

रुद्राक्ष आकार में 3 प्रकार का होता हैं जो रुद्राक्ष आकार में आँवले के फल के समान होता हैं उसे सबसे उतम माना जाता हैं। जिस रुद्राक्ष का आकार बेर के समान होता हैं उसे मध्यम और जो चने के आकार के होता हैं उसे निम्न श्रेणी का माना जाता हैं।

जो लोग रुद्राक्ष पहनते हैं, उन्हें गलत कामों से बचना और मांसाहार नही करना चाहिए । अपने माता-पिता की सेवा करें। अगर इन बातों का ध्यान नहीं रखा गया तो रुद्राक्ष से शुभ फल नहीं मिल पाते हैं।

ऐसे रुद्राक्ष न पहनें

जिस रुद्राक्ष को कीड़ों ने खराब कर दिया हो या टूटा-फूटा और पूरा गोल न हो। जिसमें उभरे हुए दाने न हों, ऐसा रुद्राक्ष नहीं पहनना चाहिए। जिस रुद्राक्ष में अपने आप डोरा पिरोने के लिए छेद हो गया हो, वह सबसे अच्छा रहता है।



Source : heraldspot

Related News

Leave a Comment