महादेव की ऐसे करें आराधना, सफलता चूमेगी आपके कदम: प्रवीण कृष्ण प्रभु

राम मिश्रा, अमेठी। अमेठी जिले मुसाफिरखाना विकासखण्ड के दादरा गांव स्थित देवी हिंगलाज धाम में चल रही शिव प्राण प्रतिष्ठा एवं रूद्र महायज्ञ का आयोजन किया गया जिसमें श्री धाम अयोध्या से पधारे श्री मदभागवत और श्री राम कथा वाचक प्रवीण कृष्ण प्रभु जी के नेतृत्व में तीसरे दिन यानि शुक्रवार को पूर्णाहूति एवं महायज्ञ का समापन हुआ इस दौरान आसपास के सैकड़ो श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी.इस दौरान कृष्ण प्रभु जी के मुख से वैदिक मंत्रोउच्चारण के ध्वनि से गुंजायमान हो रहा था।

यज्ञमंडप में बने हवन कुंड में पड़ रही आहूति से पूरा वातावरण सुगंधित हो रहा था.वहीं अहले सुबह से ही सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मण्डप का परिक्रमा कर सुख-शांति के लिए प्रार्थना की पूर्णाहूति और यज्ञ में दादरा गांव के ग्रामीणो ने बढ़-चढ़कर भाग लिया आयोजन के दौरान दिन भर देवी-देवताओं की जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो रहा था.

इसीलिए की जाती है मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा
महाराज जी द्वारा श्रोताओं को पावन कथा के रस पान भी कराया प्रवीण कृष्ण प्रभु जी ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा मूर्ति को जीवंत करती है जिससे की यह व्यक्ति की विनती को स्वीकार कर सके। प्राण-प्रतिष्ठा की यह परंपरा हमारी सांस्कृतिक मान्यता जुड़ी है कि पूजा मूर्ति की नहीं की जाती, दिव्य सत्ता की, महत् चेतना की, की जाती है। सनातन धर्म में प्रारंभ से ही देव मूर्तियां ईश्वर प्राप्ति के साधनों में एक अति महत्वपूर्ण साधन की भूमिका निभाती रही हैं।

सफलता चूमेगी कदम
प्रवीण कृष्ण प्रभु जी ने बताया कि जो आदि हैं और अंत भी, जो मृत्यु को भी देते हैं पराजय, जिनकी एक दृष्टि सारी बाधाएं हर लेती है. वो हैं देवों के देव महादेव, भगवान शिव भगवान शिव के कई नाम हैं लेकिन जो भक्तों में प्रिय है वो है भोलेनाथ, भोलेनाथ इसलिए कि वो भक्तों की भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं भक्त सच्ची श्रृद्धा के साथ जल अर्पण करके भी उन्हें प्रसन्न कर सकते है. वो सृष्टि के संहारक भी हैं और रक्षक भी क्रोध में वो तांडव करते हैं तो संसार की रक्षा के लिए समुद्र मंथन से निकला विष भी पी जाते हैं भक्तों की पीड़ा उन्हें द्रवित करती है और उनकी आराधना प्रसन्न.

महादेव की पूजा से मुसीबत ही नही अकाल मौत भी मात खा जाती है 
महाराज जी ने बताया कि अपने इष्टदेव की सुंदर सजीली प्रतिमा में भक्त प्रभु का दर्शन करके परमानंद का अनुभव करता है और शनै: शनै: ईश्वरोन्मुख हो जाता है। देवप्रतिमा की पूजा से पहले उनमें प्राण-प्रतिष्ठा करने की पीछे मात्र परंपरा नहीं, परिपूर्ण तत्त्वदर्शन सन्निहित है। देवी हिंगलाज धाम में परिसर स्थित मंदिर हिंगलाजेश्वर महादेव की आज प्राण प्रतिष्ठा हुई है इनकी पूजा मुसीबत से ही नही असमय मौत  को मात दे सकती है।

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