रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योग के निवेश को बढ़ावा देने के पक्ष में है सरकार: राजनाथ

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सरकार रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योग के निवेश को बढ़ावा देने और रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (पीएसयू) एवं आयुध निर्माण बोर्ड (ओएफबी) को सुदृढ़ करने की इच्छुक है। उन्होंने शुक्रवार को नई दिल्ली में 'रक्षा उद्योग में मेक इन इंडिया' थीम पर आयोजित गोलमेज बैठक में शीर्ष रक्षा एवं एयरोस्पेस कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षा कंपनियों के पास निर्यात के अलावा घरेलू बाजार में उल्लेखनीय योगदान करने के भी असीम अवसर हैं।
उन्होंने कहा कि रक्षा निर्माण से जुड़ी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं और आपूर्ति श्रृंखला की स्थापना करने के लिए रणनीतिक साझेदारी मॉडल को अधिसूचित किया गया है जिनके माध्यम से भारतीय कंपनियां एक प्रतिस्पर्धी एवं पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए एक साझेदार का चयन कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) नीति को उदार बना दिया गया है।
उन्होंने ऑफसेट प्रोसेसिंग का उल्लेख करते हुए कहा कि मंत्रालय ने एक संपूर्ण ऑफसेट प्रोसेसिंग पोर्टल की स्थापना की है जिसके जरिए 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के प्रस्तावों की प्रोसेसिंग की गई। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए प्रवेश संबंधी बाधाएं कम कर दी गई हैं जिसके परिणामस्वरूप जारी किए गए रक्षा लाइसेंसों की संख्या वर्ष 2014 के 215 से दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर वर्ष 2019 में 440 हो गई है।
राजनाथ ने कहा कि एक साल पहले मंत्रालय में स्थापित किए गए रक्षा निवेशक प्रकोष्ठ ने लगभग 550 प्रश्नों एवं शिकायतों का निराकरण किया है।
रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए गए विभिन्न उपायों पर प्रकाश डालते हुए राजनाथ सिंह ने उद्योग जगत से मित्र देशों को निर्यात बढ़ाने की दिशा में काम करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि निर्यात प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है और वर्ष 2016 में रक्षा खरीद प्रक्रिया को संशोधित किया गया, ताकि स्वदेशी डिजाइन, विकास और विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि स्वेदशी प्रौद्योगिकी को विकसित किए बगैर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता संभव नहीं हो पाएगी। उन्होंने देश में संबंधित प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अब इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं क्योंकि रक्षा क्षेत्र में डिजिटल प्रौद्योगिकियों का योगदान बढ़ता जा रहा है और ऐसी प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के मामले में भारत के पास व्यापक क्षमताएं है जहां स्टार्टअप्स को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उद्योग के उत्पादन ने वर्ष 2018-19 में 80,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा छुआ जिनमें से 16,000 करोड़ रुपये का योगदान निजी क्षेत्र की ओर से था।
उन्होंने कहा कि रणनीतिक अर्थव्यवस्था से काफी सुदृढ़ता प्राप्त कर रहे मजबूत राजनीतिक नेतृत्व में हमारा राष्ट्र पूरे विश्वास के साथ नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने 'मेक इन इंडिया' के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
इससे पहले सचिव (रक्षा उत्पादन) डॉ. अजय कुमार ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि रक्षा क्षेत्र से जुड़ी प्रणालियों एवं प्रक्रियाओं को और बेहतर करने के उद्देश्य से उद्योग जगत के विचारों एवं सुझावों से अवगत होने के लिए गोलमेज बैठक आयोजित की गई है।
रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक तथा मंत्रालय, रक्षा पीएसयू एवं ओएफबी के वरिष्ठ अधिकारी और शीर्ष रक्षा विनिर्माण कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तथा प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


Source : upuklive

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