पहले इस तरह मनाया जाता था रक्षा बंधन, अब बदला अंदाज...

मोहम्मद फैज़ान, अमरोहा। भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व समय के साथ बदल गया है। पहले भाई जब बहन के यहां रक्षा सूत्र बंधवाने जाता था, तो मीठे चावल से बने लड्डू साथ लेकर जाता था। इन लड्डुओं को राखी बांधने की रस्म के साथ बहन-भाई बड़े चाव से खाते थे। कहते है इससे दोनों में प्यार बढ़ता था। अब हाईटेक जमाने में यह रिवाज दूर की बात हो चली है।
अनेक बुजुर्ग बताते हैं कि मीठे चावल से बने लड्डू खाने से बहन भाई में प्यार बढ़ता था। तब बहनें इस दिन का बेताबी से इंतजार करती थी। लेकिन अब रक्षा बंधन पर्व पर विभिन्न प्रकार की मिठाईयां, फ्रूट्स आदि साथ ले जाने का प्रचलन हो गया है।  उन्होंने बताया कि इसके साथ ही राखियों में भी बदलाव आ गया है। पहले कलावे का डोरा बहन भाई की कलाई पर बांधकर अपनी रक्षा का वचन लेती थी। अब नई नई राखियों की बाजार मे धूम है।  बुर्जुग शांति देवी बताती है कि उनके जमाने में तो 15 पैसे की कलावे की लच्छी मिल जाया करती थी। आज इसकी कीमत कही अधिक है। रक्षाबंधन पर भाई बहन के घर जाकर राखी बंधवाता था। अब अधिकांश बहनें भाईयों को राखी बांधने उनके घर आ जाती है। 
राखियों से सजे बाजार
शनिवार को देश भर में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जायेगा। बाजार एक से बढ़कर एक सुंदर राखी से सजे है। वही उच्च वर्ग को ध्यान मे रखते हुए सुनारों ने सोने चांदी की राखी भी तैयार की हुई है। बाजार में सबसे बड़ी रेंज बच्चों की राखियों की है। उन्हे खुश करने के लिए तरह तरह की राखियों के अलावा आवाज निकालने वाली राखियां भी मंगाई गई है। पर्व को देखते हुए राखियों की जोरदार बिक्री हो रही है। शरीफनगर एवं सुरजननगर में बस स्टैंड के नजदीक पर सड़क के दोनों ओर फड़ लगाकर राखियां बेची जा रही हैं। सुरजननगर बस स्टैंड पर अलग-अलग प्रकार की राखियां, जैसे लक्ष्मी वाली राखी, फिल्मी हीरो वाली राखी, शिशु के टैटू वाली राखी आदि को खरीदने का रूझान अधिक दिखाई पड़ा।  

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