गरीबी और समाज के तानों से लड़कर रानी रामपाल ने बनाई अपनी अलग पहचान

नई दिल्ली। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में स्थित शाहाबाद मारकंडा से ताल्लुक रखने वाली रानी रामपाल ने छह साल की उम्र में हॉकी खेलना शुरू किया था। आज वे भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान हैं और उनकी कप्तानी में टीम अपनी एक वैश्विक पहचान बना रही है।
रानी रामपाल का सफ़र बिल्कुल भी आसान नहीं रहा।

जब वरिष्ठ भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए रानी का चयन हुआ, तब वे सिर्फ़ 14 साल की थीं और टीम की सबसे युवा खिलाड़ी थीं। साल 1980 में हुए समर ओलिंपिक के पूरे 36 साल बाद, साल 2016 में ओलिंपिक के लिए भारत ने क्वालीफाई किया और इस चयन का पूरा श्रेय उस विजयी गोल को जाता है, जो रानी रामपाल ने किया था।

द बेटर इंडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया, मैं ऐसी जगह पर पली- बढ़ी हूँ, जहाँ महिलाओं और लड़कियों को घर की चारदीवारी में रखा जाता है। इसलिए जब मैंने हॉकी खेलने की इच्छा ज़ाहिर की, तो मेरे माता-पिता और रिश्तेदारों ने साथ नहीं दिया। मेरे माता-पिता बहुत छोटी जगह से हैं और ज़्यादा पढ़े- लिखे भी नहीं हैं।

उन्हें लगता था कि स्पोर्ट्स में करियर नहीं बन सकता, और लड़कियों के लिए तो बिल्कुल भी नहीं। साथ ही, हमारे रिश्तेदार भी मेरे पिता को ताने देते थे, ‘ये हॉकी खेल कर क्या करेगी? बस छोटी-छोटी स्कर्ट पहन कर मैदान में दौड़ेगी और घर की इज्ज़त ख़राब करेगी।

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