पीड़ा प्रदेश की एक और सच्चाई, इन युवाओं को अपने सिस्टम से क्या उम्मीद होती होगी...

रवीश कुमार 
पीड़ा प्रदेश की एक और सच्चाई। इन युवाओं को अपने सिस्टम से क्या उम्मीद होती होगी, जो हम इनसे सिस्टम के लिए उम्मीद करते हैं। शुक्र है कि हिन्दू मुस्लिम का नेशनल सिलेबस आ गया जिससे इनके छह साल कट गए होंगे।

दुखद है। आप देखेंगे कि राजनीति ऐसी बुनियादी ज़रूरतों को पूरी नहीं करती है लेकिन आपको राजनीतिक बनाने के नाम पर भटकाए रखती है। अब नई थीम लाँच हो रही है। नेता अपने अपने राज्यों में असम का तरह नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न की बात करने लगे हैं।

अपने ही नागरिकों को धर्म के आधार पर शक से देखने का नेशनल सिलेबस का नया चैप्टर लाँच होगा। यही युवा इन सवालों को भूल जाएँगे कि छह साल से रिज़ल्ट नहीं निकला है। मीडिया आपको अंध राष्ट्रवादी और देशभक्त के नाम पर शक करने का अभ्यास कराता रहेगा। यह तस्वीर फिर भी उन्हें शर्मिंदा करती रहेगी जिनके भीतर कोई ज़मीर है।
(लेखक मशहूर पत्रकार व न्यूज़ एंकर हैं)

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