बुलंद हौसले और जुनून से दिव्यांगो के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनी साजिदा

संभल जिले की दिव्यांग साजिदा अपने बुलंद हौसले और जुनून से दिव्यांगो के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गई हैं. संभल जिले के चंदौसी तहसील के अंतर्गत आने वाले एक गांव के किसान की बेटी साजिदा जिसके दोनों हाथ की अंगुलियां 8 वर्ष की छोटी सी आयु में चारा काटने की मशीन से कट गई थीं.

इतनी छोटी सी आयु में दोनों हाथ की अंगुलियां कटने के बाद भी साजिदा ने अपना हौसला नहीं खोया. बल्कि चारा मशीन में कटने से बचे केवल एक अंगूठे और पैर की अंगुलियों की सहायता से लिखाई-पढ़ाई कर ग्रेजुएशन किया. 

साजिदा ने केवल पढ़ाई ही नहीं की बल्कि टेलरिंग-क्राफ्टिंग जैसे कई कामों में भी महारत हासिल की. दिव्यांग साजिदा आज अपने हुनर के दम पर अपनी शिक्षा को जारी रखते हुए परिवार की आर्थिक सहायता भी कर रही है. वह गांव के गरीब बच्चों को अपने घर नि: शुल्क शिक्षा दे रही हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साजिदा के पिता और पेशे से किसान मोहम्मद हनीफ ने बताया कि उनकी लाडली बेटी साजिदा जब 8 वर्ष की थी, उस दौरान पशुओं के लिए चारा काटने में मां की मदद करने के दौरान उसके दोनों हाथ मशीन में आने से दोनों हाथों की अंगुलियां कट गईं, बस एक अंगूठा ही शेष रहा. उन्होंने बताया कि इसके बाद मासूम बच्ची ने हिम्मत नहीं हारी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने के लिए अपने पैर की उंगलियों और हाथ के बचे अंगूठे को अपना हथियार बना लिया.


साजिदा ने अपने एक अंगूठे और पैर की अंगुलियों की सहायता से लिखने का अभ्यास शुरू किया. दिन-रात मेहनत कर साजिदा ने ग्रेजुएशन कम्प्लीट किया. कॉलेज की पढाई के साथ-साथ साजिदा ने टेलरिंग और क्राफ्टिंग का हुनर भी सीखा. अपने हुनर से साजिदा अपने परिवार की आर्थिक सहायता तो करती ही है, साथ ही गांव के गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देकर परोपकार का काम भी कर रही है.

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