सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए में संशोधनों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र की प्रतिक्रिया मांगी है. याचिकाओं विभिन्न आधारों पर इस अधिनियम में बदलाव को चुनौती देती हैं, जिनमें नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन और नागरिकों को आतंकवादी घोषित करने के लिए सशक्त एजेंसियां शामिल हैं.
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की खंडपीठ ने सजल अवस्थी और एक गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स द्वारा दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. ये नोटिस जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज मुहम्मद सईद, मुंबई आतंकवादी हमले के आरोपी जकी-उर-रहमान-लखवी और भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम आतंकवादियों के नाम को आतंकवाद विरोधी कानून में शामिल करने के दो दिन बाद आया है.
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि संसद द्वारा गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 1967 में एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दिए जाने के लगभग एक महीने बाद ये फैसले लिए गए. ये नए कानून के तहत आतंकवादी घोषित होने वाले पहले दर्जे के नाम हैं. गुरुवार को अमेरिका ने कहा था कि वो चार आतंकवादियों के रूप में नामित करने के लिए नए आतंकवाद विरोधी कानून का इस्तेमाल करने के मामले में भारत के साथ खड़ा है.
अमेरिकी सरकार के ब्यूरो ऑफ साउथ एंड सेंट्रल एशियन अफेयर्स ने ट्वीट किया, हम भारत के साथ खड़े हैं और 4 कुख्यात आतंकवादियों को नामित करने के लिए नए कानूनी अधिकारियों का उपयोग करने के लिए इसकी सराहना करते हैं: मौलाना मसूद अजहर, हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी और दाउद इब्राहिम. ये नया कानून संयुक्त रूप से भारत और अमेरिका के आतंक विरोधी प्रयासों को मजबूत करेगा.

Related News

Leave a Comment