मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- एएसआई की रिपोर्ट में राम चबूतरा की जगह है वाटर टैंक

नई दिल्ली। अयोध्या में विवादित भूमि बंटवारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 33वें दिन की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधर पर दलीलें पेश कीं. मुस्लिम पक्ष की ओर से अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में राम चबूतरे को वाटर टैंक बताया गया है. इसमें कहीं भी राम मंदिर की जगह नहीं बताई गई है. ऐसे में इस रिपोर्ट की जांच की जानी चाहिए. साथ ही कोर्ट को बताया कि एएसआई की इस रिपोर्ट पर कई एक्सपर्ट सवाल उठा चुके हैं. बता दें कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जब मामले की सुनवाई शुरू हुई तो मुस्लिम पक्ष ने कहा कि पुरातत्व को सिर्फ एक्सपर्ट के तौर पर देखा जा सकता है. उनकी बात का समर्थन करने के लिए सबूत होना भी जरूरी है. रिपोर्ट से साबित नहीं होता कि वहां गुप्त काल का निर्माण भी था. जिस महल का जिक्र किया जा रहा है, उसका निर्माण मध्यकाल का है. ऐसे में उसे 12वीं सदी का मंदिर बताना गलत है. इस पर जस्टिस एसए बोबड़े ने कहा कि ये प्राचीन दौर की बात है. इसलिए कोई राय बनाना मुश्किल है. दोनों पक्षों के तर्क अनुमानों पर आधारित हैं. हमें पता है कि पुरातत्व विभाग की तरफ से निष्कर्ष निकाले जाते हैं. हम यहां इसी आधार पर निर्णय ले रहे हैं कि किसका अनुमान सटीक है.
जस्टिस एस. अब्दुल नजीर ने मीनाक्षी अरोड़ा से कहा, आपने कहा कि पुरातत्वविदों के अनुमान के मुताबिक यह स्थान राम मंदिर है. पुरातत्व पूरी तरह से विज्ञान नहीं है. ऐसे में इस पर धारा-45 लागू नहीं होगी. इस पर मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट की जांच होनी चाहिए. सुनवाई के दौरान एक पक्षकार मोहम्मद फारुख की ओर से यूपी हाईकोर्ट के जमीन को तीन हिस्सों में बांटने के फैसले पर बहस कर रहे वरिष्ठ वकील शेखर नफाडे ने कहा कि हिंदुओं के पास उस स्थान का सीमित अधिकार है. उनके पास चबूतरे का अधिकार है. वो इसका मालिकाना हक हासिल करने की कोशिश कर रहे थे, जिसे नकार दिया गया. उन्होंने कहा कि हिंदुओं की ओर से लगातार अतिक्रमण की कोशिश की गई.
सुप्रीम कोर्ट में 5 अगस्त से अयोध्या भूमि विवाद पर रोजाना सुनवाई शुरू हुई थी. तब से हफ्ते में पांच दिन इस मामले पर बहस हो रही है. मामले को जल्द निपटाने के लिए कोर्ट अतिरिक्त एक घंटे सुनवाई कर रहा है. गुरुवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मामले को समयसीमा में खत्म करने को कहा. उन्होंने कहा कि इसकी सुनवाई 18 अक्टूबर तक खत्म होनी चाहिए. ऐसा नहीं होने पर जल्द फैसले की उम्मीद कम होगी. उन्होंने कहा था कि एक महीने में फैसला देना एक तरह का चमत्कार होगा.

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