सेबी ने स्टार्टअप के लिए की नये नियमों की घोषणा

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को स्टार्टअप को लेकर नये नियमों की घोषणा की. स्टार्टअप को शेयर बाजारों के 'इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफार्मÓ से मुख्य शेयर बाजार में जाने में मदद के लिये यह कदम उठाया गया है. इसके तहत उन्हें आईजीपी पर आने के एक साल बाद शेयर बाजार के नियमित कारोबार में जाने ओर अपने शेयरधारकों का आधार बढ़ाकर कम-से-कम 200 करने की अनुमति होगी.
कंपनी को तीन साल की लाभदायकता/ नेटवर्थ का ट्रैक रिकॉर्ड होना चाहिए या 75 प्रतिशत शेयरधारिता पात्र संस्थागत निवेशकों के साथ होना चाहिए.
निदेशक मंडल की बैठक के बाद सेबी ने कहा कि प्रवर्तक का न्यूनतम योगदान 20 प्रतिशत करने की आवश्यकता होगी. इसके लिये तीन साल की 'लॉक इनÓ अवधि होगी. अगर पहले स्टार्टअप प्लेटफार्म पर सूचीबद्धता के समय छह महीने 'लॉक इनÓ अवधि का पालन किया गया है तो उसे इसमें से हटा दिया जाएगा.
अधिकारियों ने कहा कि नियामक का विचार है कि अगर आईजीपी पर लिस्टेड कंपनियों को बिना कड़े मानदंडों का अनुकरण किये मुख्य शेयर बाजार के नियमित श्रेणी में कारोबार की अनुमति दी जाती है, इससे आईपीओ के जरिये मुख्य शेयर बाजार में आने की कड़ी प्रक्रिया का दुरूपयोग हो सकता है. जो भी कंपनी अपने शेयरों के कारोबार के लिये मुख्य शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना चाहता है, उसे कड़े खुलासा नियमों और पात्रता नियमों का पालन करना होता है और आरंभिक सार्वजनिक निर्गम लाना होता है. लेकिन आईजीपी पर सूचीबद्ध होने का इरादा रखने वाले स्टार्टअप के लिये नियमों में ढील दी गयी है.
इस मंच पर कारोबारी गतिविधियां अपेक्षाकृत सीमित होती हैं. मंजूर नियमों के तहत कंपनी को मुख्य शेयर बाजार में स्थानांतरण के लिये आईजीपी पर कम-सेकम एक साल के लिये सूचीबद्ध होना होगा. साथ स्थानांतरण के समय कम-से-कम 200 शेयरधारक होने चाहिए.

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