एसिड अटैक पीड़ितों की मदद कर रही हैं सोनी देवी

महिला सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए टॉक शो का आयोजन

जयपुर। सीआईआई के भारतीय महिला नेटवर्क (आईडब्ल्यूएन), राजस्थान चैप्टर ने यंग इंडियन (वाईआई) जयपुर चैप्टर और रजत बुक कॉर्नर के सहयोग से शुक्रवार को एसिड अटैक पीड़िता सोनी देवी, नई दिल्ली में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए भारत के पहले पुनर्वास केंद्र 'मेक लव नॉट स्कार्स से रिया शर्मा और तानिया सिह के साथ एक बातचीत सत्र आयोजित किया। इस सत्र का आयोजन महिला सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था।

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सत्र में मौजूद कई महिलाओं के लिए यह सत्र आंख खोलने वाला रहा। अपने जीवन की विभिन्न घटनाओं को साझा करते हुए सोनी देवी ने कहा कि वह हमेशा एक पुलिस अधिकारी बनने का सपना देखती थीं, लेकिन 18 वर्ष की आयु में उन्होंने शादी कर ली। दो साल बाद, उसके पति और ससुराल वालों ने अधिक दहेज की मांग करते हुए उसके चेहरे और गर्दन पर तेजाब फेंक दिया। अपने जीवन को आगे बढ़ाते हुए, जब मैंने कॉलेज में आवेदन किया, तो उनमें से किसी भी कॉलेज ने मुझे मेरी चोटों के कारण प्रवेश नहीं दिया।

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मैंने नौकरी की तलाश की 2०17 में काम के लिए दिल्ली आने के लिए मिर्जापुर छोड़ दिया। तब मुझे दूसरी एसिड अटैक पीड़िताओं के बारे में पता चला। उसी साल मैंने रिया के साथ काम करना शुरू किया। अब मैं दिल्ली में लाडो सराय में एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए पुनर्वास केंद्र चलाती हूं। मुझ पर एसिड हमले के बाद से मेरी कुल 16 सर्जरी हुईं। भले ही मैं पुलिस अधिकारी बनने में असमर्थ हूं लेकिन अब उन लोगों की मदद कर रही हूं जो हिसा का निशाना बने हैं।

आईडब्ल्यूएन राजस्थान चैप्टर की चेयरपर्सन किरण पोद्दार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ये महिला नेता नई दिल्ली में एसिड अटैक पीड़िताओं के लिए भारत के पहला पुनर्वास केंद्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। हैशटैग एंड एसिडसेल की सफलता के बाद, यह स्पष्ट हो गया कि इस टीम द्बारा जीवितों को स्थायी पुर्नवास के लिए किए जा रहे कार्यों को केवल सहयोग निधि मात्र से कराए गए सर्जरी आपरेशनों के परिभाषित नहीं किया जा सकता। उपाध्यक्ष आईडब्ल्यूएन राजस्थान चैप्टर पल्लवी मिश्रा ने आभार प्रदर्शन किया।

एक प्रोफेसर ने कैमरा देकर डॉक्यूमेंट्री बनाने को कहा

मेक लव नॉट स्कार्स की स्थापना के बारे में जानकारी साझा करते हुए रिया शर्मा ने कहा कि वह यूके में लीड्स कॉलेज ऑफ आर्ट में फैशन की पढ़ाई कर रही थी, जब उनके सामने एक एसिड अटैक पीड़िता की फोटो आई थी। अपने देश में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों से परेशान होकर, वह यूके में अपने जीवन और अपनी दिनचर्या में कठोर वास्तविकताओं का सामना कर रहीं भारतीय महिलाओं के बीच अंतर कर पाने में असमर्थ महसूस कर रही थीं।

इसके बाद, एक प्रोफेसर ने उन्हें एक कैमरा दिया और कहा कि वह भारत वापस जाएं और एसिड अटैक पीड़िताओं पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाएं। डॉक्यूमेंट्री के लिए को महज एक विचार आया था लेकिन उन्होंने इसके बजाय एक पूर्ण संगठन शुरू करने का फैसला किया।

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