जुमे की नमाज के बाद जम्मू कश्मीर में रहा सुकून

एसपी मित्तल 
सभी आशंकाओं को परे ढकेलते हुए 9 अगस्त के केन्द्र शासित जम्मू कश्मीर में जुम्मे की नमाज के बाद सुकून बना रहा। आतंकग्रस्त माने जाने वाले कश्मीर घाटी के जिलों में हालात सामान्य बने रहे। किसी भी स्थान से पत्थरबाजी या पाकिस्तान के झंडे लहराए जाने की जानकारी नहीं मिली।

जुम्मे की नमाज को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने 9 अगस्त की सुबह से ही सुरक्षा इंतजामों में ढील देना शुरू कर दिया था। लोग अपने वाहनों से इधर-उधर आ जा रहे थे। सुरक्षा बलों ने मस्जिदों पर विशेष निगरानी रखी ताकि अप्रिय घटना होने पर निपटा जा सके। पूर्व में जिन मस्जिदों से भड़काऊ भाषण सुनने को मिलते थे, उन मस्जिदों से 9 अगस्त को जुम्मे की नमाज से पहले शांति बनाए रखने की अपीलें सुनाई दी गई। अधिकांश मस्जिदों  में माइक के जरिए अपीले की गई।

प्रशासन के सूत्रों के अनुसार जम्मू क्षेत्र में आशंका के तौर पर इंटरनेट की सेवाएं बहाल कर दी गई है तथा स्कूल कॉलेज भी खोले जा रहे हैं। जम्मू और लद्दाख में बड़ी संख्या में अपने घरों से निकल कर बाजारों में खरीददारी कर रहे हैं। 9 अगस्त की स्थितियों को देखते हुए जम्मू कश्मीर प्रशासन बेहद उत्साहित है। प्रशासन के बड़े अधिकारियों का कहना है कि अब 12 अगस्त को ईद के मौके पर और ढील दी जाएगी। लोग एक दूसरे को ईद की मुबारक बाद दे सके और मस्जिदों, ईदगाहों में ईद की नमाज पढ़ सके इसके विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

8 अगस्त की रात को राष्ट्र के नाम संबोधन में भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि ईद के मौके पर जम्मू कश्मीर के सुरक्षा इंतजामों में ढील दे दी जाएगी। असल में पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को केन्द्र शासित प्रदेश बनाने और अनुच्छेद 370 में बदलाव करने के बाद 9 अगस्त को पहला अवसर रहा, जब जुम्मे की नमाज अदा की गई।

ऐसे में सुरक्षा बलों को भी गड़बड़ी की आशंका थी, लेकिन इसे जम्मू कश्मीर  के लोगों की बदलती मानसिकता ही कहा जाएगा कि अब अधिकांश लोग शांति चाहते हैं। जम्मू कश्मीर के नागरिकों के सामने यह बात साफ हो गई है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों की वजह से केन्द्र सरकार के सौ से भी ज्यादा कानून जम्मू कश्मीर पर लागू नहीं हो रहे थे, लेकिन अब पांच अगस्त के बाद से ही केन्द्र सरकार के सभी कानूनों और सुविधाओं का लाभ जम्मू कश्मीर के नागरिकों को मिलने लगेगा। आज जम्मू कश्मीर में सबसे बड़ी समस्या रोजगार और विकास की है। चूंकि अनुच्छेद 370 की वजह से ये दोनों ही सुविधाएं जम्मू कश्मीर के लोगों को नहीं मिल रही थी, इसलिए भुखमरी के हालात हो गए। महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला जैसे नेता अपने स्वार्थों की वजह से जम्मू कश्मीर के लोगों को गुमराह करते रहे। लेकिन अब जब अनुच्छेद 370 में बदलाव हो गया है तब जम्मू कश्मीर के लोग एक नए वातावरण का अहसास कर रहे हैं। 9 अगस्त को हालात सामान्य रहने पर सुरक्षा बलों ने भी राहत की सांस ली है।

वामपंथियों को हिरासत में लिया
वामपंथी नेता डी राजा और सीताराम येचुरी को 9 अगस्त को श्रीनगर के एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया गया। ये दोनों नेता जुम्मे की नमाज के मौके पर जम्मू कश्मीर के हालात बिगाडऩे के लिए आए थे। लेकिन प्रशासन ने दोनों नेताओं को एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया। बाद में दोनों नेताओं को वापस हवाई जहाज से दिल्ली भेज दिया गया। 8 अगस्त को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू कश्मीर  के पूर्व सीएम गुलाम नबी आजाद ने भी ऐसा ही कृत्य किया था। लेकिन प्रशासन ने आजाद को भी वापस दिल्ली रवाना कर दिया। प्रशासन का मानना है कि ऐसे नेता जम्मू कश्मीर के माहौल को बिगाड़ेंगे। जम्मू कश्मीर में अभी भी धारा 144 लागू है।
(ये लेखक के निजी विचार हैं)


Source : upuklive

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