B’DAY SPL: सरकारी नौकरी पाना चाहता था ये खिलाड़ी पर बन गया क्रिकेटर

इंटरनेट डेस्क:भारतीय टीम के कई बेहतरीन बल्लेबाज है जिन्होने अपनी मेहनत के दम पर इस खेल को खेलकर दुनिया मे एक खास पहचान बनाई है क्रिकेट ये खिलाड़ी किसी बॉलीवुड स्टार से कम नहीं होते जिसे उन्हे इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई मुश्किल परिस्थितियों से गुजरना होता है। क्रिकेट की दुनिया के ऐसे ही एक खिलाड़ी उमेश यादव भी है जिन्होने अपनी मेहनत के दम पर सफलता की बुलदियो को छूआ आज भारतीय टीम का ये खिलाडी अपना 31 वां जन्मदिन मना रहा है। उमेश का जन्म 25 अक्टूबर 1987 को महाराष्ट्र के नागपुर मे हुआ। उमेश के पिता नागपुर के खापरखेड़ा में एक कोयले की खान में काम करते थे। इस खिलाड़ी का जीवन काफी मुश्किल परिस्थितियों से गुजरा है। लेकिन क्रिकेट के लिए अपने प्यार और देश के लिए खेलने की उनकी इच्छा ने उनको इन मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने की हिम्मत दी और अपनी मेहनत के बल पर भारतीय टीम में इस खिलाड़ी ने जगह बनाई।

और भी की बाते है इस क्रिकेटर की जिदंगी से जुड़ी जिससे आप अनजान है तो चलिए जानते है इस क्रिकेटर की ये दिलचस्प बाते...

शायद आपको पता हो उमेश बनना तो एक कॉन्स्टेबल चाहते थे, लेकिन उनके नसीब मे कुछ और ही लिखा था। नागपुर का लड़का जो खेतों में काम करता था वो क्रिकेट का बेहतरीन खिलाड़ी बन गया।

उमेश यादव आज भारतीय क्रिकेट टीम की गेंदबाजी की रीढ़ हैं। उमेश की निजी जिंदगी में गौर करें तो इनके पिता उत्तरप्रदेश के एक गांव में कोयले की खदान में काम करते थे जबकि उमेश की परवरिश नागपुर के पास एक गांव में हुई। उमेश क्रिकेट मे आने से पहले सेना और पुलिस में नौकरी पाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हे सफलता नही मिली तो उन्होने क्रिकेट की तरफ रुख कर लिया।

क्रिकेट टीम के कप्तान प्रीतम घंदे ने उमेश को क्रिकेट के क्षेत्र में एक राह प्रदान की जिसके चलते उन्होंने घरेलू क्रिकेट में 340 विकेट लिए थे। उमेश यादव ने पहली बार लेदर की गेंद से गेंदबाजी की। इसके पहले वह टेनिस बॉल से खेलते थे। विदर्भ की टीम को घरेलू क्रिकेट में एक पिछड़ी हुई टीम के तौर पर जाना जाता है और इसी वजह से इस टीम के कप्तान प्रीतम घंदे ने उमेश यादव में छुपी हुई क्षमताओं को पहचान कर उनके करियर को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाई । आज यह खिलाड़ी अपनी मेहनत के दम पर क्रिकेट की दुनिया मे खास पहचान बना चुका है

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इस खिलाड़ी में 140 किलोमीटर की रफ्तार से लगातार गेंद फेंकने की क्षमता हैं। इन स्विंग और आउट स्विंग के साथ बाउंसर फेंकने पर उनकी पकड़ है। उनकी इसी खासियत ने 2008-09 में विदर्भ के लिए पदार्पण करने के साथ ही उन्हें केवल चार मैच में 14।60 की औसत से 20 विकेट दिला गया। उन्होंने दिलीप ट्रॉफी में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण बेहतरीन बल्लेबाजों के खिलाफ बढ़िया गेंदबाजी करके क्रिकेट की दुनिया मे अपना दबदबा कायम किया।

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Source : kalamtimes

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