सुषमा स्वराज के निधन से बाँलीवुड इंडस्ट्री में शोक की लहर

इंटरनेट न्यूज भारतीय राजनीति में तेज तरार नेताओं में शूमार सुषमा स्वराज पुर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी से लेकर मौजूदा पीएम नरेन्द्र मोदी के शासन में अनेक महत्वपुर्ण मंत्रालय के पद पर रहते हुए ऐसे काम किये हैं जिसके कारण वे लम्बे समय तक याद की जाती रहेंगी। उनकी पहचान एक वक्ता के रुप में थी। जब भी किसी मामले पर उने हैं बोलने का अवसर मिलता चाहे संसद भवन हो या संसद भवन के बाहर स्पष्ट और बेबाक रुप से अपनी राय रखती थी। इस कारण उनको लोग एक कुशल वक्ता के रुप में मानते थे।उनके आकस्मिक निधन से पूरा देश स्तब्ध हैं। सुषमा स्वराज का 6 अगस्त की रात दिल्ली के एम्स अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। वो 67 साल की थीं। सुषमा के निधन पर बॉलीवुड और भारतीय मनोरंजन उद्योग द्वारा श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है। अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, सनी देओल, रितेश देशमुख, अक्षय कुमार, अजय देवगन सहित तमाम सेलेब्रिटीज़ ने सुषमा को याद करते हुए अलविदा कहा। वेटरन एक्ट्रेस शबाना आज़मी ने सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा- सुषमा स्वराज के गुज़रने से बेहद दुखी हूं। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद हमारे संबंध सौहार्दपूर्ण थे। जब उन्होंने मुझे सूचना व प्रसारण मंत्री रहते हुए बुलाया था, तो मैं उनके नवरत्नों में से एक थी और उन्होंने फ़िल्म निर्माण को उद्योग का दर्ज़ा दिया।

वहीं जावेद अख़्तर ने कहा कि उन्होंने जिस तरह लोकसभा में अधिकारों की रक्षा के लिए जिरह की थी, उसके लिए संगीत उद्योग उनका हमेशा क़र्ज़दार रहेगा। आप दूसरों से अलग थीं। हम हमेशा आपके शुक्रगुज़ार रहेंगे।

लेकिन, फिल्म उद्योग के लिए सुषमा एक ऐसा काम कर गयीं कि मनोरंजन उद्योग उनका यह अहसान कभी नहीं उतार पाएगा।

एक वक़्त था, जब करोड़ों-अरबों का कारोबार करने वाले सिनेमा को उद्योग नहीं माना जाता है। सुषमा स्वराज पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने हिंदी सिनेमा की अर्से से चली आ रही इस मांग को ना सिर्फ़ समझा, लेकिन इसे पूरा करने के लिए पूरा जोर दिया जिसके कारण 1998 में वाजपेयी सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज फ़िल्म निर्माण को उद्योग का दर्जा दिलाया।

, उस दौर में 25 प्रतिशत से अधिक फ़िल्मों का निर्माण बाज़ार से ब्याज पर पैसे उठानेकर किया जाता था। ब्याज की यह दर 36 से 40 प्रति रहती थी। 70 प्रति फ़िल्मों में ज्वैलर्स और व्यापारी शामिल होते थे। 5 प्रतिशत से कम फ़िल्में ऐसी बनती थीं, जिनमें अंडरवर्ल्ड का पैसा लगा होता था। फ़िल्म निर्माण को उद्योग का लाभ मिलने के बाद निर्माताओं को बैंकों से लोन मिलने लगे। इस बदलाव के बाद फ़िल्निर्माण में उछाल आयी। कार्पोरेट कल्चर को बढ़ावा मिला और फिल्म निर्माण के लिए कंपनियां खुलीं। अंडरवर्ल्ड से छुटकारा मिल गया।

Related News

Leave a Comment