किन्नर आधी रात को मुंडमाला धारण करके आधी रात को साधना क्यों करते हैं, जानिए

सनातन धर्म के ‘अखाड़ों’ से अलग अखाड़ों की एक दुनिया और भी है, जिसे किन्नर अखाड़े का नाम मिला है। किन्नर सनातन धर्म का पालन करते हैं और ये महाकाल के उपासक होते हैं। ये साधना जो किन्नर करते हैं वो बहुत मुश्किल होती है जिसे हर कोई नहीं कर सकता है। यह साधना आधी रात को होती है।

आधी रात को किन्नर इस साधना में भवानी के साथ दस नरमुंडों की पूजा करते हैं और ये पूजा श्मशान में होती है। यह अघोर पूजा है जिसे कई लोग देखना भी नहीं चाहेंगे।

यदि आप इसे देख लें तो निश्चित रूप से इस से डर जाएंगे। ये साधना किन्नर अपने देवताओं को खुश करने के लिए करते हैं। इसी तरह से किन्नर की शवयात्रा भी दिन की बजाय रात में निकाली जाती है जिस से उन्हें कोई देख ना लें।

ये मान्यता है कि अगर किन्नर की शवयात्रा कोई देख लेता है तो मरने वाला फिर से किन्नर के रूप में ही जन्म लेता है। किन्नरों के अपने बहुत से अलग नियम और रिवाज हैं।

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